अनुवांशिक है डायबिटीज़ (शुगर) की बीमारी, समय रहते करें बचाव

सफीदों के सामान्य अस्पताल में विश्व मधुमेह दिवस पर हुआ सेमीनार
सफीदों – आज दुनिया में विश्व मधुमेह दिवस मनाया जा रहा है। जिससे दुनिया में डायबिटीज़ (शुगर) की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इसी क्रम में सफीदों के नागरिक अस्पताल में एक सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल में आये मरीजों व उनके साथ आये सहायकों को मधुमेह के लक्षणों, उसके बचाव और इलाज के बारे में अवगत कराया। डॉ तुषार ने कहा कि ये बिमारी अनुवांशिक बीमारी है अगर घर में किसी बड़े को पहले ये बिमारी है तो उनके बच्चों को ये बिमारी हो सकती है। समय पर बिमारी को पहचान कर इलाज करवाना और परहेज के साथ साथ व्यायाम करना भी जरूरी है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं जैसे, दिन भर खुद को थका हुआ महसूस करता है, चोट का लंबे समय में ठीक होना, इसके अलावा बार-बार भूख और प्यास का लगना, वजन का तेजी से कम होना आदि। इस मौके पर डॉ. तुषार, डॉ. संदीप बिश्नोई, स्टाफ नर्स ममतेश उपस्थित रहे।

क्या होती है डाइबिटीज
डाइबिटीज यानि शहद या शुगर, दरअसल हमारे खून में कुछ मात्रा में शर्करा(चीनी) पाई जाती इसे मेडिकल भाषा में इन्सुलिन भी कहा जाता है। जिसके बढ़ने या कम होने पर डाइबिटीज़ की बीमारी हो जाती है। इन्सुलिन पैनक्रीयास से बनने वाली एक हॉरमोन है, इसका काम है भोजन के हज़म होने के बाद जो ग्लूकोज़ मिलता है उसको कोशिकाओं में भेजकर ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करना। इसके अनियंत्रण से ग्लूकोज़ का कोई काम नहीं हो पाता और वह रक्त में रह जाता है। ज़्यादा ग्लूकोज़ इधर-उधर बिखर जाता है।

डाइबिटीज़ के प्रकार
डाइबिटीज़ टाइप 1 – इसे इन्सुलिन डिपेन्डेन्ट या जुविनाइल डाइबिटीज़ कहा जाता हैं। ये बीमारी आमतौर पर युवावस्था में होती है। इस बीमारी में शरीर के इन्सुलिन स्तर को बनाए रखने के लिए बाहरी स्रोतों का उपयोग किया जाता है।
डाइबिटीज़ टाइप 2 – नॉन-इन्सुलिन डिपेन्डेन्ट डाइबिटीज़ या एडॉल्ट ऑनसेट डाइबिटीज़, ये बीमारी अक्सर मध्यम आयु वर्ग के लोगों को होती है। इसमें व्यक्ति में अचानक मोटापा बढ़ने लगता है। जिसे एक्सरसाइज़ और संतुलित आहार से नियंत्रित किया जा सकता है।
जेसटेश्नल डाइबिटीज़ – ये डाइबिटीज़ बीमारी अक्सर गर्भावास्था के दौरान महिलाओं में होती है। जिसमें लापरवाही बरतने का असर मां और बच्चे दोनों पर ही पड़ता है।

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