वैदिक शिक्षा ही चरित्र का निर्माण कर सकती है:- भास्कर




न्यूज़ पोर्टल इंडिया सफीदों, (सुरेश शर्मा):- – आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा एवं आर्य समाज सफीदों के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे वेद प्रचार यात्रा के तीसरे दिन राजकीय उच्चतम विद्यालय सिंघाना में बच्चों को संबोधित करते हुए आर्य समाज के प्रचारक कुलदीप भास्कर ने कहा कि हमारे देश के आर्यावर्त, भारत, हिंदुस्तान व इंडिया चार नाम हैं। हमारे देश का प्राचीन नाम आर्यावर्त था, जहां केवल आर्य वैदिक शिक्षा की प्रणाली थी। पुरातन समय से गुरुकुल प्रणाली थी और उस प्रणाली में भगवान राम, भगवान कृष्ण ने पढक़र के अपने जीवन को महान बनाया था लेकिन धीरे-धीरे मुगलों और अंग्रेजों के आने से हम अपने देश के नाम को ही सर्वथा भूल गए। हमारे देश में चरित्र की शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेशी भी आते थे और हमारा देश विश्व गुरु था और धीरे धीरे हमारी वैदिक शिक्षा प्रणाली लुप्त हो गई। विदेशी व पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव मे बहकर और उसमें ओतप्रोत होकर हमने अपने खाने-पीने, सोने, चलने व बोलने तक सब कुछ भूलते गए। हमारा अपना सब कुछ हमसे जाता रहा। आज यदि हम अपने उस गौरव को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें फिर वैदिक शिक्षा की ओर वापस आना होगा। इस मौके पर आर्य समाज सिंघाना के प्रधान साहब सिंह आर्य व आर्य समाज सफीदों के धर्माचार्य कमलेश शास्त्री विशेष रूप से मौजूद थे।

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